January 27, 2023

किसान मंडी भाव

खेती किसानी व मंडी भाव से जुडी हर खबर पर नजर…

गेहूं कि फसल मे करे यूरिया के घोल का छिडकाव

किसान प्रति एकड़ गेहूं की फसलों में 50 किलो यूरिया का डोज देते है और कई किसान 50 किलो कि बजाये इस मात्रा को बढाते हुए 100 किलो से लेकर 200 किलो प्रति एकड तक का यूरिया अपनी गेहू कि फसलो मे डाल देते है, खेतो में यूरिया की अंधाधुंध उपयोग से मिटटी की गुणवत्ता कम हो रही है जिससे मिटटी धीरे धीरे बंजर होती जा रही है जिससे किसानो को और पर्यावरण दोनो को बहुत नुकसान हो रहा है।

तो क्या करे किसान ?

किसान यूरिया अंधाधुंध उपयोग को कम करने की कोशिश करे केवल आवश्यकता अनुसार हि यूरीया अपनी फसलो मे देवे जिससे आपकी फसले भी चलेगी और आपकी मिट्टी भी स्वस्थ रहेगी, एक सांथ यूरिया का अधिक उपयोग करने कि बजाये यूरिया को थोडी – थोडी मात्रा मे 2 बार मे डाले । सांथ हि किसान इसके बजाय 200 लीटर पानी में चार किलोग्राम यूरिया के सांथ एक किलो जिंक और आवश्यकता अनुसार स्टीकर का उपयोग कर चिपचिपा घोल बना लें फिर उसका फसलों पर स्प्रे करें। इससे यूरिया का दुरुपयोग रुकेगा। उत्पादन लागत कम होगी। उत्पाद गुणवत्तापूर्ण होगा। मिट्टी की संरचना नहीं बिगड़ेगी। खेतों की उर्वरा शक्ति बरकरार रहेगी। मिट्टी की जल धारण क्षमता भी कम नहीं होगी। खेती टिकाऊ और स्वस्थ होगी।

यूरीया कि बढती हुई किल्लातो मे कारगार है यूरिया का घोल

दिन प्रति-दिन बढ रही यूरिया किल्लतो से भी किसान जुझ रहे है कई बार किसानो को जरुरत से आधा यूरीया भी समय पर नही मिल पाता है ऐसे मे किसानो के लिये यूरिया के घोल का फसलो पर स्प्रे किसी चमत्कार से कम नही होगा, यूरिया के सांथ अन्य पौषक तत्वो को मिलाकर आप जिंक, बोरान, आयरन (लोहा), मैगनीज, कॉपर, सल्फर अदि कमी को भी पुरा कर सकते है, किसान यूरिया के दानों को अपने खेतो पर फेक देते है उसका केवल 30 से 40 प्रतिशत ही फसलो को मिल पाता है बाकि 60 % यूरिया बर्बाद हि चला जाता ।

नोट : स्प्रे करने से पहले ध्यान देवे कि आकाश साफ हो, ओस सूख गयी हो, हवा का दबाव कम हो तथा वर्षा का कोई आसार ना हों तो छिडक़ाव करे। आवश्यकतानुसार 2-3 छिडक़ाव 12-15 दिन के अंतराल पर करके पूरा लाभ उठाया जा सकता है।

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