September 21, 2022

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गेहूं की उन्नत किस्में 2021-2022 | gehu ki top varieties

इस पोस्ट के माध्यम से हम गेहूं की 5 नवीनतम उन्नत किस्मों (5 new varieties of wheat) के बारे में बात करेंगे और साथ ही यह भी जानेंगे कि उनसे उत्पादन कितना होता है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल (IIWBR) की मानें तो गेहूं की ये पांच किस्में सबसे नई हैं और इनसे उत्पादन भी बंपर होता है.

करण नरेन्द्र (Karan Narendra / DBW-222)

ये गेहूं की नवीनतम किस्मों में से एक  है. इसे डीबीडब्ल्यू 222 (DBW-222) भी कहते हैं. गेहूं की ये किस्म बाजार में वर्ष 2019 में आई थी और 25 अक्टूबर से 25 नवंबर के बीच इसकी बोवनी कर सकते हैं. इसकी रोटी की गुणवत्ता अच्छी मानी और जाती है. दूसरी किस्मों के लिए जहां 5 से 6 बार सिंचाई की जरूरत पड़ती है, इसमें 4 सिंचाई की ही जरूरत पड़ती है. ये किस्म 143 दिनों में काटने लायक हो जाती है और प्रति हेक्टेयर 65.1 से 82.1 क्विंटल तक पैदावार होती है.

करन वंदना (Karan Vandana/DBW-187)

इस किस्म की सबसे खास बात ये होती है कि इसमें पीला रतुआ और ब्लास्ट जैसी बीमारियां लगने की संभावना बहुत कम होती है. इस किस्म को डीबीडब्ल्यू-187 (DBW-187) भी कहा जाता है. गेहूं की ये किस्म गंगा तटीय क्षेत्रों के लिए अच्छी मानी जाती है. फसल लगभग 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. इस किस्म से प्रति हेक्टेयर लगभग 75 क्विंटल गेहूं पैदा होता है.

पूसा यशस्वी (Pusa yashasvi/HD-3226)

इसे एचडी 3226 (HD -3226 ) के नाम से जाना जाता है. गेहूं कि यह किस्म उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान के उदयपुर और कोटा संभाग, उत्तर प्रदेश के झांसी संभाग को छोड़कर, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड के लिए अनुकूल है. यह करनाल बंट, फफूंदी और गलन रोग प्रतिरोधक होती है. इसमें प्रोटीन 12.8 प्रतिशत तक होता है. पहली सिंचाई बुवाई के 21 दिन बाद की जाती है. इसकी बुवाई 5 नवंबर से 25 नवंबर तक उचित मानी जाती है. बुवाई के लिए प्रतिहेक्टेयर 100 किलो बीज की जरूरत पड़ती है. वहीं इस किस्म से प्रति हेक्टेयर 57.5 से 79. 60 क्विंटल की उपज ली जा सकती है..

करण श्रिया (Karan Shriya/DBW-252)

गेहूं की ये किस्म जून 2021 में आई थी. इसकी खेती के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य ठीक माने जा रहे हैं.लगभग 127 दिनों में पकने वाली किस्म को मात्र एक सिंचाई की जरूरत पड़ती है. प्रति हेक्टेयर अधिकतम पैदावार 55 क्विंटल है.

डीडीडब्ल्यू 47 (DDW47)

गेहूं की इस किस्म में प्रोटीन की मात्रा सबसे ज्यादा (12.69%) होती है. इसके पौधे कई तरह के रोगों से लड़ने में सक्षम होते हैं. कीट और रोगों से खुद की सुरक्षा करने में सक्षम. प्रति हेक्टेयर उत्पादन लगभग 74 क्विंटल.


गेहूं की नई किस्में 2021 ?

2021 मे नई विकसित बीज की बात करें तो हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए तीन नई किस्में –

  • DBW-296 ( डीबीडब्ल्यू-296)
  • DBW-327 (डीबीडब्ल्यू-327)
  • DBW-332 ( डीबीडब्ल्यू-332 )

गेंहू कि अन्य उन्नत किस्मे

डीडबल्यूआरबी 137 (DWRB 137 )

गेहूं की किस्म डीडबल्यूआरबी 137 सिंचित दशाओ में समय से बुआई के लिए उपयुक्त मानी जाती है. पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात छत्तीसगढ़, राजस्थान के कोटा एवं उदयपुर मण्डल के लिए उपयुक्त है.

बुआई का समय: 10 नवम्बर से 25 नवम्बर.
पकने की अवधि: 115 दिन

डीबीडबल्यू 303 करण वैष्णवी (DBW 303 Karan Vaishanavi)

गेहूं की किस्म डीबीडब्ल्यू 303 को 2021 मे अधिसूचित किया है. भारत के उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के सिंचित क्षेत्र में अगेती बुआई वाली खेती के लिए इस में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान (कोटा और उदयपुर डिवीजन को छोड़कर) और पश्चिमी उत्तर प्रदेश (झांसी डिवीजन को छोड़कर), जम्मू-कश्मीर (जम्मू और कठुआ जिले), हिमाचल प्रदेश (ऊना जिला और पांवटा घाटी) और उत्तराखंड (तराई क्षेत्र) के कुछ हिस्सों को शामिल किया गया है.

अगेती बुआई का समय 25 अक्टूबर से 5 नवंबर तक  अगेती बुवाई व 150 %  एनपीके के प्रयोग पर वृद्धि नियंत्रकों क्लोरमेक्वाट क्लोराइड (CCC) @ 0.2% + टेबुकोनाजोल 250 ई सी @ 0.1% का दो बार छिड़काव (पहले नोड पर और फ्लैग लीफ) इस किस्म में अधिक लाभकारी है. वृद्धि नियंत्रकों की 100  लीटर पानी में 200 मिली लीटर क्लोरमेक्वाट क्लोराइड और 100 मिली लीटर टेबुकोनाजोल  (वाणिज्यिक उत्पाद मात्रा टैंक मिक्स) प्रति एकड़ मात्रा का प्रयोग करें.

औसत उपज  गेहूं की किस्म डीबीडब्ल्यू 303 की औसत 81.2 क्विंटल/हे है.

पूसा तेजस (Pusa Tejas / Hi-8759)

मध्यप्रदेश के किसानों के लिए गेहूं की पूसा तेजस (Pusa Tejas Wheat) किस्म किसी वरदान से कम नहीं है. गेहूं की यह किस्म दो साल पहले ही किसानों के बीच आई है. हालांकि इसे इंदौर कृषि अनुसंधान केन्द्र ने 2016 में विकसित किया था. इस किस्म को पूसा तेजस एचआई 8759 के नाम से भी जाना जाता है.इस किस्म की बुवाई के 75 दिनों बाद बालियां निकल आतीं है और 115 से 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।

औसत उपज – प्रति हैक्टेयर 65 से 75 क्विंटल तक उपज मिल जाती है।

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