December 2, 2022

किसान मंडी भाव

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Muriate of Potash (MOP) : फसल उत्पादन के लिये पोटाश का महत्त्व एंव फायदे

सभी किसान सांथियो को मेरा नमस्कार,

आज हम खेती मे प्रयोग लाने वाले खाद पोटाश (Potash ) MOP म्यूरेट ऑफ पोटाश (muriate of potash ) जो कि पोटेशियम क्लोराइड के रूप में भी जाना जाता है इसे साधारण भाषा में पोटाश कहते हैं। इस पर विस्तार मे चर्चा करेंगे।

सभी फसलो एंव पौधों की वृद्धि के लिये कम-से-कम 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इनमें से कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन पानी तथा हवा से प्राप्त होते हैं। अन्य 13 तत्व भूमि, उर्वरक तथा खादों से मिलते हैं।

विभिन्न फसलें एक निश्चित परन्तु भिन्न-भिन्न मात्रा में पोषक तत्वों का अवशोषण करती हैं। मिट्टी में किसी भी पोषक तत्व की कमी हो जाने से पौधों का सही विकास नहीं हो पाता। इसलिये खाद व उर्वरक का उपयोग इस प्रकार से सन्तुलित होना चाहिए ताकि फसल को पर्याप्त मात्रा में सभी आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें।

फसलो मे पोटाश का महत्व एंव फायदे –

पहले हम जानेंगे फसल उत्पादन मे पोटाश का कार्य एंव महत्व जो कि निन्म प्रकार है –

  • पौधों की वृध्दि से संबंधित प्रक्रियाओं में पोटेश्‍यि‍म की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भूमिका होती है।
  • पोटेश्‍यि‍म साठ से अधिक उत्प्रेरकों (एन्जाइम) की क्रियासीलता को बढाता है।
  • प्रकाश संष्लेशण के उत्पाद को बीज, जड़, फल तथा कन्द के निर्माण के लिये उपलब्ध कराने में पोटेश्‍यि‍म सहायक है।
  • प्रोटीन की संरचना में सहायक होकर नाइट्रोजन की उपयोग क्षमता को बढ़ाता है।
  • पौधों में सूखा, पाला रोग तथा कीटों के विरूध्द अवरोध क्षमता पैदा करता है।
  • फसल की जल शोषण क्षमता में वृध्दि करके सिंचाई जल की आवष्यकता में कमी करने में सहायक है।
  • जड़-तंत्र के स्वस्थ विकास के लिये आवष्यक है तथा मिट्टी में हवा की कमी या खराब जल निकास की दषाओं को सहन करने की क्षमता उत्पन्न करता है।
  • फसल उत्पाद की गुणवत्त में वृध्दि करता है और उसकी भण्डारण अवधि में वृध्दि लाता है। इस तरह पोटाश का फसल गुणवत्ता में विषेश महत्व है।
  • फलों के आकार, रंग, चमक में सुधार लाता है जिससे बाजार में उनका अधिक मूल्य मिलता है और उपभोक्ता इन्हें अधिक पसंद करता है।
  • पोटेश्‍यि‍म फसलों को गिरने से बचाता है।
  • गन्ना, चुकन्दर, शकरकन्द तथा अन्य जड़ वाली फसलों में शर्करा के निर्माण एवं संचालन के लिये अत्यन्त महत्वपूर्ण तत्व है।
  • पोटेश्‍यि‍म सरसों, मूंगफली जैसी फसलों में तेल के निर्माण में सहायक है।
  • दलहनी फसलों में राइजोबियम द्वारा नाइट्रोजन के यौगिकीकरण में योगदान तथा नील-हरित शैवाल एवं स्वतन्त्र रूप से नाइट्रोजन यौगिकीकरण करने वाले जीवाणुओं के लिये आवष्यक पोशक तत्व है।

पोटाश (Potassium) कि कमी के लक्षण –

  • पौधों की वृध्दि तथा ओज में कमी।
  • कोषिका दीवार पतली, तना कमजोर, भोजन वाहक नली में कमी, जड़ों की संख्या एवं विकास में कमी, पत्तियों में शर्करा, संचयन तथा तनों और पत्तियों में प्रयोगित नाइट्रोजन यौगिकों का संचयन।
  • पुरानी पत्तियों की नोकों तथा किनारों पर विकसित नारंगी रंग के हरितिमा हीन धब्बे।
  • पत्तियों में हरितिमा हीन स्थान का मृत-प्राय: होना, उत्तकों का मरना तथा पत्तियों का सूखना।
  • अभाव के लक्षणों का पुरानी पत्तियों से नयी पत्तियों पर फैलना और अन्तत: पौधों का मर जाना।
  • अभावग्रस्त पौधों की जड़ों के विकास में कमी और सड़न जैसे लक्षण।
  • रोगों का प्रकोप बढ़ना।
  • सिकुड़े दाने व कम उपज
  • फलों, सब्जियों और रेषे वाली फसलों की गुणवत्ता में कमी।

फसलें पोटेषियम का उपयोग काफी अधिक मात्रा में करती है। अधिकांश फसलें पोटेषियम का निष्कासन नाइट्रोजन से अधिक करती है। मृदा उर्वरता तथा उत्पादकता के दीर्धकालिक टिकाऊपन के लिये पौधों द्वारा निष्कासित पोटाश की पूर्ति करने के लिये पोटाश उर्वरक का प्रयोग करना अत्यन्त आवष्यक है।

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