January 26, 2023

किसान मंडी भाव

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गेहूँ कि इन महत्वपुर्ण अवस्थाओ मे करे सिंचाई मिलेगा बम्पर उत्पादन | गेहूँ मे Crown root initiation (CRI Stage) क्या होती है ?

हमारे देश में गेहूँ की कम पैदावार के अनेक कारण हैं जिनमें से प्रमुख कारण सिंचाई का न होना या गलत समय पर गलत ढंग से सिंचाई करना है

Hello & Namaskaar ,

मे आपका किसान मित्र एक बार फिर आप सभी किसान भाईयो का स्वागात करता हु आपके अपने विश्वसनिय पोर्टल “किसान मंडी भाव” पर ।

आज फिर एक नई जानकारी के सांथ आप सभी किसान मित्रो के बिच उपस्थित हुआ हूं, इस पोस्ट (Article) के माध्यम से आज हम जानेंगे गेहू कि विभिन्न एंव कुछ महत्वपुर्ण अवस्थाओ मे सिंचाई प्रबंधन के बारे मे ।

हमारे देश में गेहूँ की कम पैदावार होने के अनेक कारण हैं जिनमें से प्रमुख कारण सिंचाई का न होना या गलत समय पर गलत ढंग से सिंचाई करना है, इसका एक प्रमुख कारण पानी कि कमी भी है. सांथ जहा पानी पर्याप्त मात्रा मे उपथित है वहा के किसानो के बिच सिमित जानकारीयो का आभाव व परम्परागत खेती करने के तरीके के चलते किसान भाई गेहू कि कुछ महत्वपुर्ण अवस्थाओ को अनदेखा कर देते है जिसके चलते गेहू के उत्पादन पर भारी असर पढता है ।

पौधों कि उचित वृध्दि व विकास के लिए पानी का समय पर देना आवश्यक है। पानी भूमि में पोषक तत्वों को घुलनशील बनाता है जिससे मिट्टी व खेतो मे उपस्ठित तथा हमारे द्वारा फसल मे दिये गये खाद व पोषक तत्वों को घुलनशील बना कर जडो के माध्यम से पौधों के हरे हिस्से में उन्हें पहुचानें में सहायक होता है।

कई किसान भाईयो मे गेहू कि फसल को लेकर यह भी भ्रांती होती है कि गेहू मे जितना पानी लगेगा उतनी अधिक पैदावार होगी जिसके चलते कई किसान अपने गेहू कि फसल मे नुकसान कर बैठते है जिसका विपरीत प्रभाव उनकी पैदावार पर पढता है।

खेत में अधिक पानी का जमाव होना फसल के लिए हानिकारक होता हैं। पौधो मे छोटी अवस्था में अधिक पानी भरने पर फसल की बढवार रूक जाती है, पौधें पीले पड जाते है और अन्त में सूख जाते है। बालियां निकलने के बाद अधिक पानी भरने से फसल के गिरने व सडनें का भय रहता है। बीच की अवस्थाओं में पानी जमा होने का फसल की बढवार पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है। इस प्रकार उचित समय पर उचित मात्रा में सिंचाई करना बहुत ही महत्वपूर्ण है। सिंचाई करने में जल्दबाजी भी ना करे यदि आपके खेत में गेंहू की फसल किसी भी प्रकार के स्ट्रेस या दबाव में नहीं है और 18 से 20 दिनों में भी हरी भरी दिख रही है और आपने बुआई भी समय पर की है तो आप पहली सिंचाई कम से कम 22 से 25 दिन बाद ही करे जिसके आपको काफी अच्छे परिणाम जमीनी स्तर पर देखने को मिलेंगे आप देखेंगे कि आपकी फसल में हर साल की अपेक्षा कल्लो में ज्यादा फैलाव एवम फुटाव देखने को मिलेगा साथ ही जड़ो का भी जोरदार विकास होगा जिससे वह अधिक से अधिक पौषक तत्व भूमि से लेकर पौधो तक पंहुचा पाएगी | यदि आपने गेंहू की बुआई समय के पहले या 15 दिसंबर से पहले कर दी है या। आपकी जमीन हल्की और पथरीली है और ठंड की शुरुआत भी नहीं हुई हो तो आप सिंचाई 18 से 20 दिन में भी कर सकते है |

गेहूं की फसल में सिंचाई की मात्रा सर्दियों में होने वाली वर्षा पर निर्भर करता है। यदि बारिश नहीं होती है तो लगभग 4-6 सिंचाइयों की आवश्यकता पडती है लैकिन रेतीली भूमि में 6-8 सिंचाई की जा सकती है। मटियार भूमि (भारी मिटटी) में 3-4 सिंचाई भी काफी होती है।

गेहूं में पहला पानी कब दे ? सिंचाई कि पहली एंव महत्वपुर्ण अवस्था (Crown root intiation stage )

वेसे तो गेहू कि फसल मे कई महत्वपुर्ण अवस्थाये होती है लैकिन सबसे महत्वपुर्ण अवस्थाओ मे से एक होती है सिंचाई की पहली अवस्था जिसका उपयुक्त समय गेहू कि बुआई के 20 से 25 दिन के बीच का माना जाता है इस अवस्था मे गेहू कि मुख्य जडो का विकास होता है इस अवस्था को Crown root intiation stage भी कहा जाता है . यह वह पहली महत्वपुर्ण अवस्था होती है जब पौधे को पानी की अधिक जरुरत होती है इस अवस्था मे गेहू कि फसल को पानी देने से जडो के विकास होने के सांथ – सांथ कल्लो का भी अधिक से अधिक फुटाव देखने को मिलता है । कई किसान भाई पहली सिंचाई समय पर नही कर पाते जिसके चलते उन्हे गेहू कि फसल मे अधिक फुटाव व अधिक उत्पादन नही मिल पाता है, क्योंकि किसान भाई या तो सिंचाई जल्दि 12 से 15 दिनो के बिच हि कर देते है या समय निकलने के बाद देरी से करते है जिसके चलते वे गेहू कि फसल मे अच्छा फूटाव ऐंव जड़ो का सही विकास नहीं हो पाता जिसका असर उत्पादन पर पढ़ता है |

Crown root intiation (CRI stage in wheat) क्या होती है ?

गेहूं की फसल मे शीर्ष एंव मुख्य जडो के विकास के समय को Crown root initiation stage या cri stage कहा जाता है यह अवस्था सिंचाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण व क्रांतिकारी अवस्था माना जाता है। जो गेहूं की बुआई के 20 से 25 दिन की अवस्था मानी जाती हैं। क्यों कि यह अवस्था गेहूं की फसल के लिए अति संवेदनशील होता है। अतः किसानों को गेहूं की फसलों में सिंचाई (wheat irrigation) की इस अवस्था मे विशेष ध्यान देने की जरुरत होती है। गेहू कि इस अवस्था मे जब आप गेहू के पौधो को जड से उखाड कर देखते है तब आपको पौधे के तने के निचले हिस्से मे एक गांठ बनी हुई दिखाई देती है जहा से नई जडे निकलती हुई आसानी से देखी जा सकती है उसी अवस्था को CRI Stage या Crown root initiation कहा जाता है ।

Crown Root Initiation Stage

गेहू फसल कि इस अवस्था मे सिंचाई अवश्य कर देनी चाहिए। एक रिपोर्ट में यह दावा किया जाता है कि शीर्ष जड़ निकलते समय सिंचाई में प्रतिदिन की देरी होने पर एक कुंटल प्रति हेक्टेयर की दर से उपज मे हानि होती है।
यदि किसानों के पास गेहूं की सिंचाई (wheat irrigation) करने के लिए सिर्फ एक सिंचाई का ही विकल्प हो तो उन किसानों को गेहूं की शीर्ष जड़ निकलते समय यानी 20 से 25 दिन की अवस्था में ही सिंचाई करने की सलाह दी जाती है।

सिंचाई कि अन्य महत्वपुर्ण अवस्थाए एंव सिंचाई प्रबंधन

क्र.सिंचाई करने कि अवस्थाबुआई के लगभग औसत दिनो बाद
1.मुख्य जड बनाते समय20 से 25 दिनो मे
2.कल्लों के विकास के समय40 से 45 दिनो मे
3.तने में गाँठ पडते समय65-70 दिनो मे
4.फूल आते समय85-90 दिन
5.दानों में दूध पडते समय105-110 दिन
6.दाना सख्त होते समय120-125 दिन

उपर दि गई जानकारी मे गेहू कि किस्मो के आधार पर दिन आगे पिछे हो सकते है .

अन्य महत्वपुर्ण बाते –

उचित मात्रा में पानी उपलब्ध होने पर उपयुक्त सभी अवस्थाओं मे सिंचाई करनी चाहिए क्योंकि पौधों की बढवार के लिए प्रत्येक अवस्था में पानी की आवश्यकता पडती है। कुछ ऐसे क्षेत्र होते है जहां पानी पूरी सिंचाई के लिए उपलब्ध नही होता है। ऐसे क्षेत्रों में सिंचाई विशेष अवस्था में करें। परीक्षणों से यह पता चला है कि पौधों के जीवन चक्र मे कुछ ऐसी अवस्थाएं होती है जबकि पानी की कमी के कारण उन्हें सर्वाधिक हानि पहुंचती है। यह अवस्थाएं सिंचाई की दृष्टि से क्रान्तिक अवस्थाएं कहलाती है। “गेहूँ की फसल में मुख्य जड के विकास तथा फूल आने का समय सिंचाई की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है।” इसलिए जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सीतित सुविधाएं प्राप्त है, वहां पानी का उपयोग सिंचाई के लिए निम्नलिखित तरीके से करना चाहिए। इस बात को अच्छी तरह ध्यान में रखना चाहिए कि केवल क्रान्तिक अवस्थाओं में ही सिंचाई करने से बम्पर उपज प्राप्त की जा सकती है।

  • यदि पानी केवल एक सिंचाई के लिए उपलब्ध है तो यह सिंचाई मुख्य जड के विकास की अवस्था में कर देनी चाहिए जो बौनी किस्मों में बोआई के 20-25 दिन बाद आती है।
  • यदि पानी दो सिंचाइयों के लिए उपलब्ध है तो पहली सिंचाई मुख्य जड के विकास के समय तथा दूसरी फूल आते समय करनी चाहिए।
  • यदि पानी तीन सिंचाइयों के लिए उपलब्ध है तो पहली सिंचाई मुख्य जड के विकास के समय, दूसरी सिंचाई तने में गाँठ बनते समय तथा तीसरी दाने में दूध बनते समय करनी चाहिए।
  • यदि चार सिंचाइयों की सुविधा है तो 1 पहली सिंचाई मुख्य जड बनते समय, 2 तने में गाँठें बनते समय, 3 बाली निकलते समय तथा 4 दानों में दूध बनते समय करनी चाहिए।

गेहूँ में सबसे ज्यादा नुकसान मुख्य जड बनते समय सिंचाई न करने से होता है। गेहूँ में विभिन्न क्रांतिक अवस्थाओं पर सिंचाई न करने से पैदावार पर कितना प्रभाव पडता है यह मेने आपको उपर दि गई जानकारी मे स्पष्ट रुप से बताया है। किसान भाई अगर इन कुछ छोटी – छोटी बातो पर ध्यान देंगे तो अवश्य ही उन्हे बेहतर परिणाम मिलेंगे |

आशा करता हू उपर दि गई जानकारीआपको पसंद आई होगी आगे भी आप तक इसी प्रकार कि कई महत्वपुर्ण जानकारी पहुचायी जायेगी. जानकारी अन्य किसान मित्रो के सांथ भी अवश्य शेयर करे, पोस्ट पढने के लिये धन्यवाद आपका दिन शुभ हो |

ऊपर दि गई जानकारी से संबंधित कोई भी सवाल हो तो आप नीचे कमेंट के माध्यम से हम तक अवश्य साझा करे या आप हमे kisanmandibhav@gmail.com पर ई – मेल भी कर सकते है |

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